मैं भी एक घर हूँ
बेहद साधारण सा
पर जैसे हर घर में होते हैं
मुझमे भी हैं
कई कमरे
एक आँगन जो सिमट गया है आजकल एक बालकनी में
उसी बालकनी में तुलसी का पौधा लगा हुआ है
जो पैदा हुआ है संस्कारों से
ड्राइंग रूम भी है
जिसमे सजा रखे है कई सारे चित्र
दीवारों पर लटकते हुए याद दिलाते हैं कुछ हसीन पल
कुछ और चित्रों के लिए दीवारों पर जगह अभी बाकी है
और है एक किचन
जहाँ हर रोज़ पकाता हूँ मैं अपना भोजन
और कभी-कभार 'ख़याली पुलाओ' भी
गुसलखाना भी है
जहाँ साफ़ कर लेता हूँ मैं अपना मैल
और चमका लेता हूँ अपने आवरण को
और सबसे ज़रूरी मेरा है एक मकान मालिक भी...
बेहद साधारण सा
पर जैसे हर घर में होते हैं
मुझमे भी हैं
कई कमरे
एक आँगन जो सिमट गया है आजकल एक बालकनी में
उसी बालकनी में तुलसी का पौधा लगा हुआ है
जो पैदा हुआ है संस्कारों से
ड्राइंग रूम भी है
जिसमे सजा रखे है कई सारे चित्र
दीवारों पर लटकते हुए याद दिलाते हैं कुछ हसीन पल
कुछ और चित्रों के लिए दीवारों पर जगह अभी बाकी है
और है एक किचन
जहाँ हर रोज़ पकाता हूँ मैं अपना भोजन
और कभी-कभार 'ख़याली पुलाओ' भी
गुसलखाना भी है
जहाँ साफ़ कर लेता हूँ मैं अपना मैल
और चमका लेता हूँ अपने आवरण को
और सबसे ज़रूरी मेरा है एक मकान मालिक भी...

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